नया शिल्प और ताज़गी बहुत बड़ी खूबी है !
' चिंताघर ' पर — श्रीलाल शुक्ल
पूरे जेबकतरे हैं, लिखने से पहले जेब काट लेते हैं... बोलने से पहले जीभ काट लेते हैं, जो सोचता हूँ , भांप लेते हैं !
'बोसकीयाना' — पर गुलज़ार
महत्वपूर्ण और विलक्षण है !
'कॉमरेड गोडसे ' पर कमलेश्वर








